UPTET 2026 : Sanskrit Language (PYQ- 2019) Mock Test – 8 10/05/202610/05/2026 Manoj Singh UTET 2019 संस्कृत भाषा टेस्ट (61-90) UPTET 2019 – संस्कृत टेस्ट 61. संस्कृत के ‘एकोनचत्वारिंशत्’ को कहते हैं- 39 29 59 49 62. ‘द्वि’ शब्द, स्त्रीलिंग, प्रथमा विभक्ति का रूप है- द्वौ द्वयम् द्वि द्वे 63. ‘ददति’ रूप है- लट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन लोट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन लोट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन 64. ‘गुरूपदेशः’ शब्द में प्रयुक्त संधि है- दीर्घ संधि गुण संधि अयादि संधि यण् संधि 65. उपसर्ग है- यदा कुत्र यत्र परा 66. ‘मनोरथः’ में संधि है- अनुनासिक संधि परसवर्ण संधि उपर्युक्त में से कोई नहीं विसर्ग संधि 67. ‘नेत्राभ्याम् अश्रूणि पतन्ति’ में नेत्राभ्याम् पद में विभक्ति है- द्वितीया पञ्चमी सप्तमी षष्ठी 68. ‘अशनि’ शब्द है- स्त्रीलिंग नपुंसक लिंग उपर्युक्त सभी पुल्लिंग 69. ‘तया नृपोऽनुगम्यते’ में वाच्य है- कर्मवाच्य भाववाच्य उपर्युक्त में से कोई नहीं कर्तृवाच्य 70. ‘यूपदारु’ पद में समास है- बहुब्रीहिः द्वन्द्वः तत्पुरुषः अव्ययीभावः 71. ‘गोधूम’ शब्द का अर्थ है- चावल गेहूँ गधा गाय का दूध 72. विसर्ग संधि का उदाहरण है- सन्मित्रम् महौषधिः नमस्ते तल्लयः 73. स्पर्श संज्ञक वर्णों की संख्या है- 25 08 30 5 74. ‘बालिका’ इस पद में प्रत्यय है- डाप् याट् टाप् चाप् 75. ‘पर्यन्त’ में उपसर्ग है- परि परा पर् प्र 76. ‘नद्यः’ शब्दरूप में प्रयुक्त वचन है- बहुवचन द्विवचन एकवचन और बहुवचन दोनों एकवचन 77. अकारान्त पुल्लिंग शब्द का उदाहरण है- वाचम् रामः फलम् भानुः 78. ‘प्रेजते’ में संधि है- वृद्धि पूर्वरूप पररूप गुण 79. ‘व’ वर्ण का उच्चारण स्थान है- दन्त ओष्ठ तालु दन्तोष्ठम् 80. घुटने के लिए उपयुक्त संस्कृत शब्द है- जानु ऊरु जघन हनु गद्यांश: समाजे सर्वत्र दुर्जना: पीडयन्ति जनान्। यद्यपि सज्जनानां संख्या अधिका अस्ति तथापि दुर्जना एव प्रबला इति महदाश्चर्यम्। यतो हि सज्जना: प्राय: तटस्था: भवन्ति। यदि दुर्जनानां प्रतिपदं विरोधं सज्जना: करिष्यन्ति तर्हि निश्चयेन समाज: निर्भयो भविष्यति। 81. उपर्युक्त गद्य के अनुसार समाज में किसकी संख्या कम है? शिक्षकों की निर्भयों की दुर्जनों की सज्जनों की 82. उपर्युक्त गद्य के अनुसार दुष्ट लोग समाज में क्यों प्रबल दिखते हैं? क्योंकि सज्जन तटस्थ रहते हैं। क्योंकि उनकी पहुँच होती है। क्योंकि उनकी संख्या अधिक होती है। क्योंकि वे धनी होते हैं। श्लोक: महान् वृक्षो जायते वर्धते च तं चैव भूतानि समाश्रयन्ति। यदा वृक्षश्छिद्यते दह्यते च तदाश्रया अनिकेता भवन्ति।। 83. इस श्लोक का भाव है- वृक्ष पर सारे प्राणी आश्रित होते हैं वृक्ष को काटना या जलाना नहीं चाहिए प्राणी जो वृक्ष पर आश्रित होते हैं, वृक्ष के नष्ट होने पर वे भी निराश्रित हो जाते हैं वृक्ष महान होता है 84. उपर्युक्त श्लोक में ‘भूतानि’ का तात्पर्य है- प्राणी आश्रय नाश वृक्ष 85. ‘भू’ धातु का लोट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन रूप है- भवसि भवानि भवतु भव 86. सर्वनाम शब्द है- सर्वः स्थूलः प्रातः पुत्रः 87. ‘कुञ्जर’ शब्द का अर्थ है- हाथी हिरण सुअर सर्प 88. ‘मातृ’ शब्द का तृतीया विभक्ति एकवचन में रूप होता है- मातया मात्रा माता मात्रया 89. सुबन्धु की रचना है- वासवदत्ता मेघदूतम् अभिज्ञानशाकुन्तलम् स्वप्नवासवदत्तम् 90. निम्नलिखित में से कौन-सा स्वर है? वृ लृ उपर्युक्त में से कोई नहीं ह्री परीक्षा समाप्त करें Post Views: 1,412