UPTET 2026 : Sanskrit (PYQ – 2018) Mock Test – 7 02/05/202602/05/2026 Manoj Singh UPTET 2018 संस्कृत पूर्ण टेस्ट (30 प्रश्न) UPTET 2018 PYQ : संस्कृत टेस्ट प्रश्न 61 से 90 | पूर्ण 30 प्रश्न व्याख्या सहित 61. ‘ड़’ का उच्चारण स्थान है– (d) मूर्धा (a) कण्ठ (b) तालु (c) नासिका व्याख्या ‘ऋटुरषाणां मूर्धा’ सूत्र के अनुसार ‘ड़’ का उच्चारण स्थान मूर्धा है [1]। 62. ‘चौरभयम्’ पद में प्रयुक्त तत्पुरुष समास किस विभक्ति का है? (c) पञ्चमी (a) तृतीया (b) चतुर्थी (d) द्वितीया व्याख्या ‘चौरभयम्’ का विग्रह ‘चौरात् भयम्’ है, अतः इसमें पञ्चमी तत्पुरुष समास है [3]। 63. ‘पितॄन्’ शब्द में विभक्ति और वचन है– (b) द्वितीया, बहुवचन (a) द्वितीया, एकवचन (c) तृतीया, एकवचन (d) प्रथमा, बहुवचन व्याख्या पितृ शब्द के द्वितीया विभक्ति बहुवचन का रूप ‘पितॄन्’ होता है [4]। 64. ‘नद्यः’ शब्द में विभक्ति और वचन है– (c) प्रथमा, बहुवचन (a) षष्ठी, बहुवचन (b) प्रथमा, एकवचन (d) षष्ठी, एकवचन व्याख्या नदी शब्द का प्रथमा विभक्ति बहुवचन रूप ‘नद्यः’ है [5]। 65. ‘षण्णवतिः’ हिन्दी संख्या का बोधक है– (b) छियानवे (a) छाछठ (c) सरसठ (d) छत्तीस व्याख्या ‘षण्णवतिः’ का अर्थ छियानवे (96) है [5]। 66. ‘भवत’ क्रियापद में प्रयुक्त लकार, पुरुष और वचन है– (d) लोट्, मध्यम, बहुवचन (a) लृट्, प्रथमा, एकवचन (b) लोट्, प्रथमा, एकवचन (c) लोट्, प्रथमा, बहुवचन व्याख्या भू धातु के लोट् लकार के मध्यम पुरुष बहुवचन का रूप ‘भवत’ है [6]। 67. सर्वनाम शब्द नहीं है– (c) अपि (a) यूयम् (b) तौ (d) तस्मै व्याख्या ‘अपि’ (भी) एक अव्यय शब्द है, सर्वनाम नहीं [6]। 68. ‘स्वस्ति’ पद के योग में प्रयोग की जाने वाली विभक्ति है– (a) चतुर्थी (b) द्वितीया (c) पञ्चमी (d) षष्ठी व्याख्या ‘नमः स्वस्ति स्वाहा…’ सूत्र के अनुसार स्वस्ति के साथ चतुर्थी विभक्ति होती है [7]। 69. ‘कादम्बरी’ ग्रन्थ के रचनाकार हैं– (b) बाणभट्ट (a) भवभूति (c) भास (d) श्रीहर्ष व्याख्या कादम्बरी के रचयिता बाणभट्ट हैं [7]। 70. महाकवि कालिदास द्वारा विरचित नाटक है– (c) मालविकाग्निमित्रम् (a) रघुवंशम् (b) कुमारसम्भवम् (d) मेघदूतम् व्याख्या मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम् और अभिज्ञानशाकुन्तलम् कालिदास के नाटक हैं [8]। 71. व्यञ्जन सन्धि का उदाहरण है– (c) सज्जनः (a) साधूक्तम् (b) पावकः (d) जलौधः व्याख्या ‘सज्जनः’ (सद् + जनः) श्चुत्व व्यञ्जन सन्धि का उदाहरण है [9]। 72. ‘उत्तमपुरुष’ से सम्बन्धित सर्वनाम शब्द है– (c) वयम् (a) युवाम् (b) सः (d) तस्मिन् व्याख्या ‘वयम्’ (अस्मद्) उत्तम पुरुष का सर्वनाम है [9]। 73. ‘धृ’ धातु में ‘क्तिन्’ प्रत्यय का योग करने पर रूप बनता है– (c) धृतिः (a) धृत्वा (b) धरतिः (d) धति व्याख्या धृ + क्तिन् = धृतिः। क्तिन् प्रत्यय भाववाचक संज्ञा बनाता है [10]। 74. छन्दोनुगत शिक्षण प्रणाली होती है– (a) पद्य की (b) गद्य की (c) व्याकरण की (d) कथा की व्याख्या छन्द, रस और अलंकार पद्य (कविता) की विशेषताएँ हैं [11]। 75. शुद्ध वाक्य है– (d) त्वं गृहं गच्छसि (a) सः गृहं गच्छसि (b) त्वं गृहं गच्छति (c) अहं गृहं गच्छति व्याख्या मध्यम पुरुष कर्ता ‘त्वम्’ के साथ क्रिया ‘गच्छसि’ शुद्ध है [11]। 76. ‘वनेऽपि’ पदे कः सन्धि– (b) पूर्वरूप (a) अयादि (c) पररूप (d) यण् व्याख्या ‘एङः पदान्तादति’ सूत्र से वने + अपि = वनेऽपि (पूर्वरूप सन्धि) है [12]। 77. नीतिमार्र्ग के न परिलङ्घयन्ति– (c) कुलीनाः (a) जनाः (b) सेवकाः (d) बालकाः व्याख्या सज्जन या कुलीन लोग नीति मार्ग का उल्लंघन नहीं करते हैं [12]। 78. ‘तत्रैव’ में सन्धि है– (c) वृद्धि सन्धि (a) दीर्घ सन्धि (b) गुण सन्धि (d) पूर्वरूप सन्धि व्याख्या तत्र + एव = तत्रैव (वृद्धि सन्धि) [13]। 79. संस्कृत में अयोगवाह वर्णों की संख्या है– (b) चार (a) पाँच (c) छः (d) तीन व्याख्या अनुस्वार, विसर्ग, जिह्वामूलीय और उपध्मानीय अयोगवाह कहलाते हैं [13]। 80. ‘अनुरूपम्’ में समास है– (c) अव्ययीभाव (a) द्वन्द्व (b) बहुब्रीहि (d) तत्पुरुष व्याख्या रूपस्य योग्यम् = अनुरूपम्। प्रथम पद अव्यय होने से अव्ययीभाव समास है [14]। 81. कौन स्वर ह्रस्व नहीं होता है– (d) ओ (a) ऋ (b) उ (c) ऌ व्याख्या ‘ओ’ संयुक्त स्वर है, इसका ह्रस्व रूप नहीं होता [14]। 82. ‘सहयुक्तेऽप्रधाने’ सूत्र किस विभक्ति का बोधक है– (c) तृतीया विभक्ति (a) द्वितीया विभक्ति (b) पञ्चमी विभक्ति (d) चतुर्थी विभक्ति व्याख्या सह, साकम्, सार्धम् और समम् के साथ तृतीया विभक्ति होती है [15]। 83. ‘बालकावपि’ शब्द का सन्धि–विच्छेद होगा– (a) बालकौ + अपि (b) बालकाः + आवापि (c) बालका + वपि (d) बालकाव + अपि व्याख्या अयादि सन्धि सूत्र ‘एचोऽयवायावः’ से बालकौ + अपि = बालकावपि [15]। 84. बगुले को संस्कृत में कहते हैं– (b) बकः (a) चटकः (c) कपोतः (d) काकः व्याख्या बकः का अर्थ बगुला होता है [16]। 85. ‘हरये क्रुध्यति’ में ‘हरये’ में कौन–सा कारक है– (c) सम्प्रदान (a) करण (b) अपादान (d) कर्त्ता व्याख्या क्रुध् धातु के योग में जिस पर क्रोध किया जाए, वह सम्प्रदान कारक होता है [16]। 86. ‘अस्मद्’ शब्द का षष्ठी, बहुवचन रूप है– (b) नः (a) युष्माकम् (c) मम (d) तव व्याख्या अस्मद् शब्द के षष्ठी बहुवचन में ‘अस्माकम्’ या ‘नः’ रूप बनता है [17]। 87. ‘रमा’ शब्द का चतुर्थी, एकवचन रूप है– (c) रमायै (a) रमाय (b) रमया (d) रमये व्याख्या रमा (आकारान्त स्त्रीलिंग) का चतुर्थी एकवचन रूप ‘रमायै’ है [18]। 88. ‘पितृ’ शब्द का सप्तमी, एकवचन रूप है– (b) पितरि (a) पित्रे (c) पिते (d) पित्र्याम् व्याख्या पितृ (ऋकारान्त पुल्लिंग) का सप्तमी एकवचन रूप ‘पितरि’ है [18]। 89. ‘इक्’ प्रत्याहार के अन्तर्गत वर्ण आते हैं– (c) इ, उ, ऋ, ऌ (a) इ, उ, ऋ, ल (b) अ, इ, उ, ऋ (b) इ , ई , उ, ऋ व्याख्या इक् प्रत्याहार में इ, उ, ऋ, ऌ वर्ण शामिल हैं [2]। 90. माहेश्वर सूत्रों की संख्या है– (a) चौदह (b) चौबीस (c) बारह (c) दस व्याख्या महर्षि पाणिनि के अनुसार माहेश्वर सूत्रों की कुल संख्या 14 है [2]। स्कोर देखें Post Views: 867